यहाँ राजू और निशा की पूरी कहानी हिंदी में है।
यहाँ राजू और निशा की पूरी कहानी हिंदी में है।
5/8/20241 min read
यहाँ राजू और निशा की पूरी कहानी हिंदी में है।
यहाँ राजू और निशा की पूरी कहानी हिंदी में है। बहुत सारी भावनाएँ, रोमांस, जुनून, गंदी बातें, आवाज़ें और डिटेल्स के साथ। सभी सीन में दोनों की सहमति, दोनों 25+ उम्र के।
ऑफिस ट्रिप – वो तीन दिन जो कभी भूल नहीं पाए
कंपनी ने लोनावला में 3 दिन की रिसॉर्ट ट्रिप बुक की थी। टीम के साथ मस्ती, बॉन्फायर, गेम्स… और एक बहुत बड़ा स्विमिंग पूल जो आधी रात तक खुला रहता था।
राजू (सीनियर एग्जीक्यूटिव, 29) और निशा (मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव, 26) पिछले 4 महीनों से चुपके-चुपके रिलेशन में थे। ऑफिस में किसी को पता नहीं था। लेकिन इस ट्रिप ने सब कुछ बदल दिया।
1. स्विमिंग पूल – आधी रात (11:45 बजे)
डिनर और बॉन्फायर के बाद ज्यादातर लोग अपने रूम में चले गए थे। कुछ लोग अभी भी लॉन में पी रहे थे।
निशा ने काला वन-पीस स्विमसूट पहना था – सिंपल, लेकिन उसके शरीर पर इतनी खूबसूरती से चिपका हुआ कि राजू की साँस रुक गई। वो चुपके से पूल में उतर गई। राजू 2 मिनट बाद उसके पीछे।
पूल में नीली लाइट जल रही थी। गहराई वाले हिस्से में दोनों मिले।
निशा ने पानी के अंदर ही अपने पैर राजू की कमर पर लपेट लिए। उसके निप्पल्स स्विमसूट के पतले कपड़े से सख्त होकर साफ महसूस हो रहे थे।
वो उसके होंठों से लगभग चिपककर फुसफुसाई: “सारी टीम सो रही है… और मुझे सिर्फ तू चाहिए…”
किस शुरू हुआ – धीमा, गहरा, भूखा। राजू के हाथ स्विमसूट के साइड से अंदर गए, उसके स्तनों को दबाया। निशा उसके मुँह में ही हल्के से सिसकारी।
फिर वो नीचे सरकी, साँस ली और पानी के अंदर चली गई। राजू के शॉर्ट्स थोड़े नीचे किए और मुँह में ले लिया – गर्म, गीला, धीरे-धीरे चूसना।
राजू ने पूल का किनारा पकड़ लिया, सिर पीछे करके आँखें बंद कर लीं। जब निशा साँस लेने ऊपर आई, होंठों से पानी टपक रहा था, तो बोली: “तेरा स्वाद मुझे बहुत पसंद है…”
दोनों पूल के कोने में आए जहाँ पानी थोड़ा कम था। निशा मुड़ी, किनारे को पकड़ा, गांड पीछे की तरफ। राजू ने स्विमसूट को साइड में सरकाया और एक जोरदार धक्का – पूरा अंदर।
पानी हर धक्के के साथ छलक रहा था। निशा चुप रहने की कोशिश कर रही थी, पर नहीं रह पा रही थी।
“फक मी… जोर से… राजू… चोद मुझे… बहुत जोर से… आह्ह्ह्ह…”
राजू ने उसके गीले बाल पकड़े, हल्के से पीछे खींचा। तेज़-तेज़ धक्के – पानी चारों तरफ उड़ रहा था।
निशा पहले झड़ी – पूरा शरीर काँप रहा था, अपनी बाँह को काटकर आवाज़ दबाई। “आआह्ह्ह… मैं आ रही हूँ… ओह्ह्ह फक… हाँ… हाँ…”
राजू 30 सेकंड बाद उसके अंदर ही झड़ गया – उसके कान में धीरे से कराहते हुए: “निशा… ले मेरा सब… आह्ह्ह…”
दोनों एक मिनट तक ऐसे ही रहे – जुड़े हुए, तेज़ साँसें, पानी उनके चारों ओर लहरा रहा था।
2. होटल रूम – बेड पर (2:15 बजे)
दोनों चुपके से राजू के सिंगल रूम में घुसे। दरवाज़ा बंद होते ही कपड़े उड़ने लगे।
निशा ने राजू को बेड पर धक्का दिया। ऊपर चढ़ी। गर्दन, छाती, पेट पर किस करते हुए नीचे गई। फिर बहुत गहराई से मुँह में लिया।
बहुत गीला, बहुत आवाज़ वाला ब्लोजॉब – गैगिंग साउंड, चूसने की आवाज़, सिसकारियाँ। वो ऊपर देखकर बोली: “पसंद है ना… जब मैं तुझे ऐसे चूसती हूँ?”
राजू ने उसे ऊपर खींचा, पीठ के बल लिटाया। पैर चौड़े किए। धीरे-धीरे चाटना शुरू – नीचे से क्लिट तक लंबी चाट। फिर क्लिट को जोर से चूसा, साथ में दो उंगलियाँ अंदर-बाहर।
निशा पागल हो गई – कमर ऊपर-नीचे, हाथ राजू के बालों में। “राजू… ओह्ह्ह गॉड… चाट मुझे… और जोर से… हाँ… वहीँ… आह्ह्ह्ह… मैं फिर से आने वाली हूँ…”
वो काँपते हुए झड़ी – जाँघों से राजू का सिर दबा लिया।
फिर उसने गिड़गिड़ाई: “अब डॉगी में चोद… आज मुझे कुत्ती बना दे…”
वो घुटनों और हाथों पर आ गई – गांड ऊपर, कमर नीचे। राजू ने कमर पकड़ी और एक झटके में पूरा अंदर।
“फक यस… ऐसे ही… जोर-जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…”
राजू ने जोर-जोर से पीटा – बेड हिल रहा था, हेडबोर्ड दीवार से टकरा रहा था। निशा अब बेझिझक चिल्ला रही थी:
“चोद मुझे… और जोर से… फक मी हार्ड… हाँ… हाँ… और तेज़… ओह्ह्ह गॉड… तेरा लंड कितना मोटा है… मुझे मार डाल ऐसे…”
राजू ने उसकी गांड पर थप्पड़ मारा – एक, दो। वो और जोर से कराही।
“थप्पड़ मार… हाँ… और जोर से… मैं तेरी रंडी हूँ आज रात…”
राजू ने बाल पीछे खींचे। और तेज़ चोदा। निशा तकिए में मुँह दबाकर फिर झड़ी। राजू उसके अंदर ही झड़ गया – उसका नाम पुकारते हुए।
दोनों पसीने से तर, हाँफते हुए गिर पड़े। फिर हल्के से हँसने लगे।
3. नाइट बस में वापसी – कम्बल के नीचे (रात 11 बजे)
वापसी की बस – ओवरनाइट वॉल्वो। स्लीपर बर्थ। राजू और निशा को किसी तरह पास-पास लोअर बर्थ मिल गए।
सर्दी की रात – बहुत ठंड। सब कम्बल में दुबके थे।
एक घंटे बाद लाइट बंद, बस में सिर्फ इंजन की आवाज़।
निशा का हाथ धीरे से राजू के कम्बल में आया। उसे पहले से ही हाफ सख्त मिला। धीरे-धीरे सहलाया… फिर कम्बल के नीचे मुँह में ले लिया।
बहुत धीमा, बहुत चुपचाप ब्लोजॉब – सिर्फ होंठ और जीभ। राजू आवाज़ न निकले, इसके लिए तड़प रहा था।
फिर निशा मुड़ी, एक पैर हल्का ऊपर किया। पीछे से अंदर गाइड कर लिया – स्पूनिंग पोजीशन में, कम्बल के नीचे।
बहुत धीमे-धीमे चोदना – छोटे-छोटे धक्के, बर्थ हिले नहीं।
वो उसके कान में फुसफुसा रही थी:
“पूरी बस सो रही है… और तेरा लंड मेरी चूत में है… कितना गंदा और मजेदार लग रहा है ना… ऐसे ही चुपके-चुपके चोद मुझे…”
राजू ने उसका मुँह हाथ से ढक लिया – वो हल्के से उंगली काटती रही। राजू और गहराई तक गया।
निशा चुपचाप झड़ी – शरीर काँप रहा था, आँखें बंद, आनंद के आँसू। राजू उसके अंदर ही खत्म हुआ – कंधे पर दाँत गड़ाकर चुप रहा।
पूरी रात वे ऐसे ही जुड़े रहे – कम्बल के नीचे।
4. ऑफिस वापसी के बाद – 3rd फ्लोर स्टोर रूम (अगले मंगलवार)
ट्रिप के बाद पहला दिन। दोनों के बीच टेंशन असहनीय हो चुकी थी।
लंच ब्रेक में दोनों गायब।
स्टोर रूम – अंदर से लॉक।
बात करने की जरूरत नहीं थी।
निशा बॉक्स पर झुकी – स्कर्ट ऊपर, पैंटी नहीं। राजू सीधे डॉगी में गया।
जोरदार। तेज़। बेकरार।
निशा अब खुलकर मोअन कर रही थी:
“फक मी हार्ड… वैसा ही जैसा पूल में किया था… जोर से… चोद मुझे राजू… हाँ… मेरी चूत फाड़ दो…”
राजू ने पीछे से उसकी गर्दन हल्के से पकड़ी – जानवर की तरह चोदा।
“ले… ले मेरी जान… 2 दिन से मेरी चूत तेरा लंड माँग रही थी…”
निशा दो बार झड़ी – एक बार खड़े होकर, दूसरी बार जब राजू ने उसका एक पैर बॉक्स पर रख दिया।
आखिरी में राजू ने बाहर निकालकर उसकी गांड पर छोड़ा। निशा ने उंगलियों से रगड़ा और चाट लिया, आँखों में देखते हुए।
फिर धीरे से किस करके बोली: “कल लंच में… कॉन्फ्रेंस रूम?”
राजू बस मुस्कुराया – पहले से ही फिर सख्त हो चुका था।
बताओ – कौन सा सीन सबसे ज्यादा पसंद आया? या आगे क्या चाहिए – ऑफिस में और सीन, कार में, उसके घर पर जब फैमिली बाहर हो, या कुछ और रिस्की? 😈